कुछ लोग सितम करने को तैयार बैठे हैं ,
कुछ लोग मगर हम पे दिल हार बैठे हैं,
इस कशमकश में पहचाने नहीं जाते,
कहाँ दुश्मन कहाँ दोस्त यार बैठे हैं,
इश्क को आज का दरिया ही समझ लीजिये हुज़ूर,
कोई इस पार तो कोई उस पार बैठे हैं,
कौन कहता है के इस शहर में सारे हैं बेवफा,
हमारे सामने वफादार दो चार बैठे हैं,
कल तक जिन्हें हसरत थी हमें बदनाम करने की,
आज वही लोग अपने किये पर सर्मसार बैठे हैं,
दुनिया से रूठ जाने की ख्वाईश है हमारी,
क्या करून उस ख्वाईश पे पहरेदार बैठे हैं!
कुछ लोग मगर हम पे दिल हार बैठे हैं,
इस कशमकश में पहचाने नहीं जाते,
कहाँ दुश्मन कहाँ दोस्त यार बैठे हैं,
इश्क को आज का दरिया ही समझ लीजिये हुज़ूर,
कोई इस पार तो कोई उस पार बैठे हैं,
कौन कहता है के इस शहर में सारे हैं बेवफा,
हमारे सामने वफादार दो चार बैठे हैं,
कल तक जिन्हें हसरत थी हमें बदनाम करने की,
आज वही लोग अपने किये पर सर्मसार बैठे हैं,
दुनिया से रूठ जाने की ख्वाईश है हमारी,
क्या करून उस ख्वाईश पे पहरेदार बैठे हैं!
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